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Major D.P. Singh / मेजर-देवेंदर पाल सिंह ( Motivational Story ) in Hindi

Major D.P. Singh मेजर-देवेंदर पाल सिंह ( Motivational Story )

 

Major D.P. Singh

आज हम आपको बब्बर शेर योद्धा Warrior मेजर देवेंदर पाल सिंह ( Major D.P. Singh ) की 

ज़िन्दगी की कहानी ( Life Story ) बताने जा रहे है जो उन्हों ने 2015 में जयपुर Jaipur के एक

प्रोग्राम में बताई थी – आपको याद होगा 15 July 1999 जब भारत ( India ) और पाकिस्तान

( Pakistan) का कारगिल युद्ध ( Kargil War ) चल रहा था . हिमालय में मेजर देवेंदर पल सिंह

( Major D.P. Singh ) पाकिस्तानी दुश्मन फ़ौज के साथ लड़ रहे थे उन्हों ने दुश्मनों को नीस्त –

नाबूद कर दिया लेकिन लड़ते लड़ते दुश्मनों का एक बूम उन के नजदीक आकर फट गया – उससे

वो बुरी तरह से घायल हो गए . सब साथ के सिपाहियों ( फौजियों ) ने मान लिया की वो मर चुके

है . वैसेही हालत में उनको नजदीकी फौजी अस्पताल में लाया गया . लेकिन वहा अस्पताल में

उनको मृत घोषीत किया गया था . जाब उनको मुर्दा घर लेजाया गया तो एक डॉक्टर ( Doctor )

ने देखा की देवेन्द्र पाल सिंह ( Major D.P. Singh ) की कोई हलकी सी हरकत हुई है और उनकी 

साँसे चल रही है . बम के इतने पास फट ने के बाद किसी भी सामान्य इंसान बच जाना नामुमकिन

ही होता है . लेकिन देवेन्द्र पाल सिंह  ( Major D.P. Singh ) तो एक असामान्य इंसान लोह-पुरुष 

बब्बर शेर थे. दुश्मनों का बम भी उनको नहीं मार सका वो मौत को मात दे चुके थे. देवेन्द्र पाल सिंह

को बोहुत ज्यादा गंभीर चोट आई थी , पूरी अंतडीया ( Intestine ) खुल कर बहार आगई थी कुछ

अंतडीया ( Intestine ) काटनी पड़ी और ऐसा करने के सिवा कोई चारा नहीं था , उनको बचाने

के लिए डॉक्टर ( Doctor ) को उनका एक पैर/टांग  ( Leg ) काट देना पड़ा – लेकिन कोई भी कीमत

पर मेजर देवेंदर पाल सिंह मरने को तैयार नहीं थे . उनको अस्पताल ( Hospital ) में तक़रीबन एक

साल से ज्यादा वक़्त रहेना पड़ा – इन दिनों में उन्हें बोहोत सारे समस्यायों का सामना करना पड़ा .

उनके पेट के कई बार ओपरेशन करने पड़े उनको उनकी सुनाई देने की क्षमता भी कम हो चुको थी .

लेकिन देवेन्द्र पाल सिंह  ( Major D.P. Singh ) ने कभी हिम्मत नहीं हारी . आज भी उनके शारीर

में बम के 35 से 40 टुकड़े अलग अलग हिस्सों में मौजुद है जिसे निकाला नहीं जा सकता है –

 

एक साल बाद

तक़रीबन एक साल बाद हस्पताल से छुट्टी मिल गयी – घर आने के बाद वो बैसाखी के सहारे 

चलने लगे लेकिन उनको बोहोत तकलीफ और दर्द हो रहा था उसके बाद उनको  कृत्रिम पैर 

( Prosthetic leg ) लगाया गया लेकिन उससे भी उनके दर्द में कोई रहत नहीं थी जयपुर के

एक प्रोग्राम में देवेन्द्र पाल सिंह  ( Major D.P. Singh ) ने बताया की समय के साथ मैंने 

अपने जिंदगी को ढाल लिया उन्होंने यह भी कहा के मै खास कर उन लोगो का शुक्रगुजार

हु-जिन्होंने मुझे किसी काबिल नहीं समझा था अगर वो लोग मुझे ऐसे नजर्ये से नहीं देखते

तो मै कभी फिर से खड़ा नहीं हो सकता था.

 

# nevergiveup

realindiaguru

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